आध्याशक्ति माँ काली अनन्तरूपों व अनंत रहस्यों वाली हैं | भारतवर्ष ही नही अपितु सम्पूर्ण विश्व ही शिव शक्ति की उपासना किसी न किसी रूप में करता ही हैं | दुर्गा , पार्वती व महाकाली नामों से जाने वाली सब शक्ति एक ही हैं | माँ सदैव ही अपने भक्तों का कल्याण करती है व शुभ फल देती हैं | पश्चिम बंगाल में माँ काली के तीन मुख्य मंदिर हैं |

तारापीठ

माँ तारा , माँ काली का ही रूप हैं | तारापीठ भारतवर्ष के प्रमुख सिद्ध स्थलों में से एक हैं | मान्यता है की माँ तारा के धाम से कोई खाली हाथ नहीं आता | सती का त्रिनेत्र ( तीसरी आँख ) यहाँ गिरा था | तारा पीठ महर्षि वशिष्ठ की तपस्थली भी रही है । यह मंदिर महाशम्शान के बीच में हैं | तारापीठ की कोलकाता से दूरी लगभग २७० किमीo हैं | निकटवर्ती क़स्बा रामपुर हाट है, जो जिला बीरभूम में पड़ता है । अनेकों सिद्ध साधकों ने यहाँ पर तपस्या की है , किन्तु महर्षि वशिष्ठ व माँ के परमभक्त बामाखेपा भक्तों में विशिष्ट स्थान रखते है ।

दक्षिणेश्वरी काली मंदिर

दक्षिणेश्वरी काली मंदिर कोलकाता में स्थित हैं । यह मंदिर रानी रासमणि ने बनवाया था । श्री रामकृष्ण परमहंस दक्षिणेश्वरी मंदिर में पुजारी थे । श्री रामकृष्ण परमहंस ने यहीं रहते हुए अनेकों कठोर साधनायें की थी व आध्यात्म के उच्चतम स्तर को प्राप्त किया था । रामकृष्ण परमहंस को माँ काली के परमभक्तों में सर्वश्रेष्ठ स्थान प्राप्त हैं । गंगा के पूर्वी तट पर मंदिर व नदी के दूसरी ओर बेलूर मठ है । मंदिर प्रांगण में बारह ज्योतिर्लिंग स्थापित हैं । मंदिर प्रांगण में स्वामी रामकृष्ण परमहंस जी का कक्ष है | माँ की मूर्ति के सामने बहुत बड़ा हॉल है , जहाँ पर भजन कीर्तन चलता हैं |

कालीघाट मंदिर

कालीघाट मंदिर माँ काली का विश्व प्रसिद्ध मंदिर हैं | यहाँ सती के दायें पैर का पंजा गिरा था | कालीघाट भारतवर्ष का प्रमुख सिद्धपीठ है | यहाँ आज भी काली माँ को नियमित बलि दी जाती हैं | हुगली नदी के पूर्वी तट पर स्थित काली मंदिर सन 1855 में बनाया गया था। प्रत्येक अमावस्या को माँ की विशेष पूजा की जाती है तथा आरती के बाद विशेष भोग लगाया जाता हैं |

कल्पतरु महोत्सव

कल्पतरु महोत्सव माता महाकाली के भक्तों व श्री रामकृष्ण परमहंस के शिष्यों, अनुयायियों व हिन्दुओं द्वारा मनाया जाने वाला धार्मिक पर्व है । रामकृष्ण मिशन व रामकृष्ण सेवाश्रम द्वारा पुरे भारतवर्ष में प्रत्येक वर्ष १ जनवरी को मनाया जाता हैं । मान्यता है की स्वामी रामकृष्ण परमहंस ने १ जनवरी १८८६ को अपने शिष्यों के समक्ष अनेक साधनाओं , सिद्धियों व आध्यात्म के अनेकों गोपनीय विषय सार्वजानिक किये व शिष्यों की सभी इच्छाओं व मनोकामनाओं को पूरा होने का आशीर्वाद दिया | कालान्तर में कोलकाता में अनेक शिष्यों ने इसकी पुष्टि भी की । कल्पतरु महोत्सव माँ काली की विशेष पूजा व श्री रामकृष्ण परमहंस को सम्मान देने व प्रार्थना द्वारा मनोकामना पूर्ति का विशेष अवसर है ।

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